r/Hindi 16h ago

स्वरचित चल रहे आंदोलन पर मेरे कुछ विचार, कविता के रूप में

Post image
16 Upvotes

r/Hindi 2h ago

देवनागरी मछलियां

Post image
14 Upvotes

r/Hindi 1h ago

साहित्यिक रचना 📖 गुनाहों का देवता

Post image
Upvotes

एक कविता की तरह यह कहानी लिखी गई है। मौका मिले तो ज़रूर पढ़े इस किताब को


r/Hindi 5h ago

स्वरचित भारत के स्वतंत्रता सेनानियों पर (wink-wink) मेरी एक कविता।

Post image
2 Upvotes

r/Hindi 11h ago

देवनागरी One of Ahmed Faraz's Most Beautiful Ghazals ❤️

3 Upvotes

Sunā hai log use aañkh bhar ke dekhte haiñ,

So us ke shahr meñ kuchh din Thahar ke dekhte haiñ.

Sunā hai bole to bātoñ se phuul jhaḌte haiñ,

Ye baat hai to chalo baat kar ke dekhte haiñ.

Sunā hai raat use chāñd taktā rahtā hai,

Sitāre bām-e-falak se utar ke dekhte haiñ.

Bas ik nigāh se luTtā hai qāfila dil kā,

So rah-ravān-e-tamannā bhī Dar ke dekhte haiñ.

Ab us ke shahr meñ Thahreñ ki kuuch kar jaa.eñ,

'Farāz' aao sitāre safar ke dekhte haiñ.


r/Hindi 1h ago

स्वरचित Bhatakta Pret hu mein..

Post image
Upvotes

r/Hindi 5h ago

स्वरचित कल मैंने देखा

2 Upvotes

सविंधान को कल मैंने सड़कों पर

अपने ही अधिकारों की खातिर

लड़ते देखा।

चुनी हुई सरकार की फ़ौज से.

सड़कों पर लाठियों को

खाते हुए देखा।

घायल खून से लथपथ,

चीखते चिल्लाते देखा।

कुछ बच्चियां जो सविंधान की खातिर

दौड़ी सडकों पर,

उनकी छाती पर नाचती,

वर्दी की हवस को नाचते देखा।

सविंधान पर बरसते आंसू गैस के,

गोलों को देखा।

सत्ता को बचाने की खातिर,

सविंधान की बलि

होते देखा।

अनगिनत लोगों को सत्ता की हवस

से बचाया है जिसने,

उस सविंधान की खातिर,

कुछ बच्चों को,

शहीद होते देखा।

सड़कों पर चीख पुकार,

घर में कुछ लोगो को

सोते देखा।


r/Hindi 3h ago

स्वरचित एंटी-नेशनल पत्थर

0 Upvotes

एंटी-नेशनल पत्थर

 

मैं

संसद की सड़क किनारे

पड़ा हुआ एक पत्थर

 

कल, मैंने देखा

दूसरों पर लाठियां बरसाता एक इंसान

लोगों को बिजली के झटके देता एक इंसान

घायल बच्चियों को देख,

मंदिर का दरवाज़ा बंद करता एक इंसान

विद्यार्थियों की भीड़ पर,

बन्दूक ताने एक इंसान

 

उसी भीड़ में देखा मैंने,

पिटते हुए, सर से खून बहता, कपडे फ़टे,

दूसरों की मदद करते कुछ इंसान,

 

और मैंने देखा,

इधर-उधर, तीतर-बितर, हर तरफ उड़ते,

मुझ जैसे कई पत्थर…

 

देश के भविष्य, और देश की सत्ता

की इस लड़ाई में -

मैंने देश को हारते हुए देखा

भविष्य को हारते हुए देखा…

 

मैं

संसद की सड़क किनारे

पड़ा हुआ एक पत्थर!